MPPSC मुख्य परीक्षा : Sd Academy की दो छात्राये डीएसपी पद पर चयनित
झाबुआ : 19 अप्रेल को घोषित म.प्र लोक सेवा आयोग की 2015 परीक्षा के परिणाम घोषित हुए जिनमे एक बार फिर झाबुआ के युवाओ ने अपना दबदबा कायम रखा। निकिता सिंह व ललिता गडरिया डीएसपी पद पर चयनित हुई वही कैलाश सस्तिया ने नायब तहसीलदार पद पर अपना नाम किया कैलाश सस्तिया का नाम सहायक संचालक वित्त विभाग में भी प्रतीक्षा सुची में है।
लोक सेवा भर्ती में अंचल का दबदबा कायम
सभी विद्यार्थी सामान्य प्रष्ट भूमि से सम्बंधित है। इन सभी ने अपनी आर्थिक परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए झाबुआ शहर में रहकर ही परीक्षा की गहन तयारी की और सिद्ध किया की सच्ची लगन और चुनोतियो से जूझने का जूनून हो तो कोई भी समस्या रास्ते की बाधा नहीं बन सकती। अपने दूसरे प्रयास में ही २३ वर्ष की कम उम्र में डीएसपी पद पाने वाली निकिता सिंह का कहना है की उनके पापा का सपना था की में प्रशासनिक सेवाओं में जाऊ इसके लिए वे मुझे हमेशा प्रोत्साहित करते रहे उनकी आकांक्षा को पूरा करने का जूनून इतना था की अध्यन करते समय केवल एक ही लक्ष्य रहता था मैंने श्री संजीव दुबे सर के सानिध्य में अपने जूनून को कभी विराम नहीं रहने दिया। रोज १२-१४ घंटे जमकर तयारी की जहाँ प्री एग्जाम में मैंने तथ्यात्मक आधार पर नोट्स बनाये वही मुख्य परीक्षा को ध्यान में रखते हुए अवधरणात्मक अप्रोच को अपनाया जबकि साक्षात्कार हेतु दुबे सर द्वारा लिए गए मौक इंटरव्यू से में अपनी सफलता के लिए आश्वस्त हो चुकी थी जिसका परिणाम हम सब के सामने है.

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कैलाश सस्तिया ,नायब तहसीलदार |
सफलता सुविधाओं से नहीं वरन मेहनत सच्ची लगन और माहौल से आती हैकैलाश सस्तिया जिनका चयन नायब तहसीलदार पद पर हुआ है वे भी ग्रामीण पृष्टभूमि से समबन्धित है और वर्तमान में पशुपालन विभाग में संगणक के पद पर कार्यरत है. कैलाश सस्तिया ने बताया की आरभ से ही इच्छा थी की कुछ ऐसा काम करे जिससे भील समाज के अन्य युवक युवती समाज का नाम रोशन करने के लिए प्रोत्साहित हो , यही वह जज्बा था जो उन्हें रात दिन मेहनत करने का सम्बल प्रदान करता है
एमपीपीएससी या युपीएससी में सफल होने वाले विद्यार्थी को यह ध्यान रखना चाहिए की सफलता सुविधाओं से नहीं वरन मेहनत सच्ची लगन और माहौल से आती है जिसके लिए हमें कही बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है वरन हम जहाँ पर है वही पर बना जा सकता है. ग्रामीण अंचल के विद्यार्थी अपने पसीने की कमाई लेकर इंदौर जैसे शहरो में जाते है जहाँ पर व्यावसायिक कोचिंग संस्थाओ के द्वारा लाखो की फीस वसूली जाती है भीड़ में उन पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता और फीस का औचित्य सिद्ध करने के लिए कोचिंग संस्थाओ के द्वारा भ्रांतिपूर्ण मार्गदर्शन दिया जाता और फलस्वरूप हताशा के रूप में परिणाम सामने आने लगते है
एक्सपर्ट व्यू

झाबुआ में प्रतिभाओ की कमी नहीं है वरन प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है हमे इन प्रतिभाओ को किसी भी तरह से पैसा एकत्र कर बड़े शहरो में जाने का सुझाव देने के बजाय झाबुआ में ही अनुकूलित माहौल बनाए का प्रयास करना चाहिए इस कार्य में माता पिता शिक्षक व अन्य बुद्धिजीवी प्रभावशाली भूमिका का निर्वहन कर सकते है
संजीव दुबे
संचालक , Sd Academy , Jhabua
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